EQ - IQ - SQ - Development of Mind Powers


Emotional Quotient (EQ) - (भावनात्मक गुणक)


EQ यानी इमोशनल कोशेंट. यह आपकी फीलिंग्स से जुड़ा है। इसकी मदद से आप खुद अपने इमोशंस और दूसरों के इमोशंस को समझते हैं और उन्हें मैनेज करते हैं। EQ आपस में अच्छे रिश्ते बनाने व सही वक्त पर सही तरीके से रिएक्ट करने जैसे कामों में मदद करता है। 

अगर आप अपने दोस्त या भाई-बहन की बहुत केयर करते हैं, उनके साथ चीजें शेयर करते हैं, खाने की चीजें उनके लिए बचाकर रखते हैं, किसी अनजान को भी चोट लगे देखकर आपको तकलीफ होती है तो आपका EQ काफी अच्छा है। जो लोग बहुत बड़ी कामयाबी हासिल करते हैं, उसमें EQ का काफी रोल होता है। 

कोई एक फैसला IQ के लेवल पर सही, तो EQ के लेवल पर गलत साबित हो सकता है। जैसे कि हिरोशिमा, नागासाकी पर बम गिराना, IQ के लेवल पर सही फैसला हो सकता है लेकिन EQ के लिहाज से यह पूरी तरह गलत फैसला था।

यह दूसरों की तकलीफ को समझना भर नहीं है, बल्कि उनके दर्द को महसूस करना भी है। निगेटिव इमोशंस को कम करना, तनाव नहीं लेना, मुश्किल फैसले लेना, बुरे वक्त से लड़कर बाहर निकलना और रिएक्टिव के बजाय प्रो-एक्टिव बनकर EQ को बेहतर किया जा सकता है।


Intelligence Quotient (IQ) - (बुद्धिलब्धि)


IQ यानी इंटेलिजेंट कोशेंट. यह आपके सोचने-समझने और नॉलेज हासिल करने से जुड़ा है। आप दिमागी तौर पर किसी काम को कितने बेहतर तरीके से कर सकते हैं, यह IQ तय करता है। अगर आप किसी सवाल को हल करने, नए आइडिया देने या कुछ भी नया सीखने में अपने दोस्तों से आगे रहते हैं, उसे कम पढ़ाई कर ज्यादा मार्क्स लाते हैं तो मुमकिन है कि आपका IQ उनसे बेहतर हो।

आमतौर पर यह पैदाइशी होता है और आपके जीन्स यानी पैरंट्स का भी इसमें रोल होता है। बड़े होकर जॉब परफॉर्मेंस, लीडरशिप कैपेबिलिटी, फैसले लेने की क्षमता जैसी चीजों पर भी इसका असर होता है। वैसे, लाइफ में अकेले IQ के दम पर कामयाबी हासिल नहीं की जा सकती। 

इसमें EQ और SQ का भी रोल होता है। यूं तो माना जाता है कि IQ पूरी जिंदगी एक जैसा ही रहता है और इसे बढ़ाया नहीं जा सकता। फिर भी मेमरी गेम्स खेलकर और खुद को चैलेंज करने यानी कुछ हटकर और नया सोच कर इसे कुछ बेहतर किया जा सकता है। साथ ही, खुद को रिलैक्स रखने से भी नतीजे बेहतर आते हैं।


Social Quotient (SQ) - (सामाजिक भाव)


SQ यानी सोशल कोशेंट, यह आपकी सोशल स्किल्स को देखने और परखने का जरिया है। IQ बेशक पैदाइशी होता है, लेकिन SQ आप ज्यादातर आपने आसपास के लोगों को देखकर सीखते हैं। इसे आम बोलचाल में इंटरपर्सनल इंटेलिजेंस, या कॉमन सेंस भी कह सकते हैं। 

इसमें बातचीत और दूसरों की बात को सुनने और समझने की आर्ट जैसी चीजें शामिल होती हैं। अगर आप दोस्तों में बहुत पॉपुलर हैं, लोग अपनी प्रॉब्लम आपसे शेयर करते हैं, आपको भी दूसरों के साथ वक्त बिताने में मजा आता है तो आपका SQ अच्छा है।

जिनका SQ ज्यादा होता है, वे दूसरों के साथ बेहतर तालमेल बिठा पाते हैं और हर तरह के लोगों के साथ घुल-मिल जाते हैं। इमोशनल इंटेलिजेंस SQ आपस में जुड़े हैं क्योंकि दोनों में ही
इमोशंस काफी खास हैं। कुछ एक्सपर्ट मानते हैं कि सोशल इंटिलिजेंस से ही कोई एक शख्स दूसरे शख्स से अलग साबित होता है। 

मेहनत और कोशिश से आप SQ को बेहतर कर सकते हैं। इसके लिए आपको अपने आसपास पर ज्यादा गौर से देखना होगा। अपनी कम्यूनिकेशन स्किल्स सुधारकर बेहतर स्पीकर बनना होगा। नेटवर्किंग सुधारनी होगी। एक और SQ होता है, जिसे स्प्रिचुअल कोशेंट कहते हैं। 

यह आपकी स्प्रिचुअल इंटेलिजेंस की बात करता है। हमारे 5 सेंस (देखना, सुनना, स्वाद, सूंघना और छूना) से आगे की इंटेलिजेंस को स्प्रिचुअल इंटेलिजेंस कहा जाता है। यह किसी इंसान के धरती पर मौजूद दूसरी जिंदगियों के साथ संबंधों पर फोकस करता है। 

अगर आपको किसी नदी को गंदा करने पर तकलीफ होती है, किसी पेड़ की टहनियां तोड़ने पर दर्द होता है, किसी जानवर के दर्द पर तड़प महसूस होती है तो आपका स्प्रिचुअल इंटिलेजेंस अच्छा है। यह पेड़-पौधे, पानी से और यूनिवर्स में मौजूद हवा, गैस और यहां तक कि वैक्यूम से भी खुद को जोड़कर देखने की बात करता है। यह जो उन दोनों दुनिया की बात करता है जो नजर आती है और जो नजर नहीं आती। मेडिटेशन और प्रेयर के जरिए इसे बेहतर किया जा सकता है।


मन की शक्तियों का विकास (Development of Mind Powers)


दोस्तों हमारे शरीर की शक्ति के विकास के लिए हम दो चीजें करते है एक उसका पोषण करते है मतलब की पोषण युक्त आहार लेते है और दूसरा शरीर की Exercise करते है। ठीक उसी तरह मन की शक्ति के विकास के लिए भी ये दो चीजें आवश्यक है। मन का आहार तथा मन की Exercise

मन का आहार - पाजिटिविटी मन का आहार है


  • पोसिटिव बोलना,

  • पोसिटिव पढ़ना,

  • पोसिटिव सोचना

इत्यादिसे मन को पोषण मिलता है।


मन की Exercise -


  • रिलैक्सेशन,

  • विज्युलिजेशन ओर

  • मैडिटेशन से मन की Exercise होती है।

अगर हम हरदिन इस प्रेक्टिस जारी रखेंगे, हर दिन हम पॉजिटिव रीडिंग करेंगे, पॉजिटिव सोचेंगे, पॉजिटिव बाते करेंगे, मैडिटेशन, Visualization ओर Relaxation करेंगे तो हम अपनी मन की शक्तियों को विससित कर सकते है ओर उनसे इस्तेमाल करके हमारा जीवन बेहतरीन बना सकते है।



नोट - मित्रों आशा है की आपको अब EQ - IQ - SQ (SQ) और मन की शक्तियों का विकास कैसे करना है ये समझ आ गया होगा ? तो फिर देरी किस बात की है बस लग जाईये अपने मन की शक्तियों के विकास में और आज से ही इनका पालन करना आरम्भ कर दीजिये और फिर देखिये किस आश्चर्यजनक तरीके से अपनी सफलता की और बढते चले जायेंगे। आपको ये लेख कैसा लगा हमें ज़रूर बताईयेगा। हमें आपके सुझाव और अपने अनुभव का इंतज़ार रहेगा।

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